कौन जा रहा है जिम?

कौन जा रहा है जिम?

कौन जा रहा है जिम? — जनसांख्यिकी और भागीदारी

भारत में फिटनेस का नक्शा तेजी से बदल रहा है। कोविड के बाद स्वास्थ्य-जागरूकता, सोशल मीडिया का प्रभाव, और टियर-2/3 शहरों में बढ़ती जिम उपलब्धता ने “जिम जाना” को रोज़मर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बना दिया है। इस लेख में हम ताज़ा रिपोर्टों और अध्ययनों के आधार पर जिम कल्चर के उभार, उसके लाभ-हानि और सुरक्षित तरीके से फिटनेस अपनाने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

  • युवा और महिलाएँ: मिलेनियल/Gen-Z की भागीदारी अधिक दिखती है; महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है—समूह कक्षाएँ और स्ट्रेंथ-ट्रेनिंग दोनों ही लोकप्रिय हैं। (वैश्विक सदस्यता रुझानों से संकेत)
  • टियर-2/3: किफ़ायती मेंबरशिप, नए फ्रेंचाइज़ी आउटलेट्स, और सोशल-मीडिया-ड्रिवन प्रेरणा ने छोटे शहरों में भी मांग बढ़ाई है।

1) भारत का फिटनेस परिदृश्य: तस्वीर कितनी बदली?

  • जिम/फिटनेस सेंटर की पैठ अभी कम, पर ग्रोथ तेज़
  • इंडियावॉच की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जिम/फिटनेस सेंटर की पैठ लगभग ~0.5% आंकी गई है, लेकिन शहरीकरण, बढ़ती आमदनी और युवा आबादी जैसे कारकों से बाज़ार तेज़ी से फैल रहा है।
  • टियर-2/3 शहरों में उछाल
  • 2024 के एक इनसाइट्स दस्तावेज़ में बताया गया कि टियर-1 के साथ टियर-2 शहरों में भी जिम कल्चर लोकप्रिय हो रहा है; लोगों की प्रेरणाएँ (वजन घटाना, बॉडी-रीकंप, स्पोर्ट्स-परफॉर्मेंस, मानसिक स्वास्थ्य) विविध हैं।
  • उपकरण/गुड्स का बाज़ार बढ़ रहा है
  • 2024 में भारत का स्पोर्ट्स एवं फिटनेस गुड्स मार्केट ~USD 4.88 बिलियन तक पहुँचा और आने वाले वर्षों में ~7.4% CAGR से बढ़ने का अनुमान है—यह घर-पर वर्कआउट और जिम, दोनों ट्रेंड्स को सपोर्ट करता है।
  • शारीरिक निष्क्रियता अभी भी चुनौती
  • WHO की 2022 कंट्री प्रोफ़ाइल बताती है कि पर्याप्त शारीरिक सक्रियता न होना भारत में एक बड़ा सार्वजनिक-स्वास्थ्य मुद्दा बना हुआ है; वैश्विक विश्लेषण भी 2022 में वयस्कों में ~31% अपर्याप्त शारीरिक सक्रियता का अनुमान देता है—जो फिटनेस इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर देता है।

2) क्या बदल रहा है: उभरते रुझान (Trends)

  • सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स का असर
  • सौंदर्य-मानकों, “ट्रांसफ़ॉर्मेशन” स्टोरीज़ और ट्रेनिंग-न्यूट्रिशन कंटेंट की आसान उपलब्धता ने जिम को “क्विक-स्टार्ट” विकल्प बना दिया है—यह प्रभाव टियर-2/3 तक दिख रहा है।
  • हाइब्रिड फिटनेस (जिम + ऑनलाइन)
  • पोस्ट-पैंडेमिक दौर में जिम सदस्यता लौटने के साथ ऑनलाइन/ऐप-बेस्ड कोचिंग भी बनी हुई है; वैश्विक स्तर पर इंडस्ट्री रेवेन्यू 2019 से 2024 में बढ़ा है, जिससे रिकवरी/ग्रोथ का संकेत मिलता है।

3) जिम कल्चर के प्रमुख फायदे

3.1 शारीरिक स्वास्थ्य

  • हृदय-स्वास्थ्य, डायबिटीज़/मोटापे का जोखिम घटाना: नियमित एरोबिक + रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग ग्लूकोज़ कंट्रोल, रक्तचाप और बॉडी-कंपोज़िशन में सुधार करती है—यही कारण है कि WHO पर्याप्त शारीरिक गतिविधि पर ज़ोर देता है।

3.2 मानसिक स्वास्थ्य

  • एक्सरसाइज़ से मूड, नींद और स्ट्रेस-मैनेजमेंट बेहतर होता है; समुदाय/समूह-कक्षाएँ सामाजिक सपोर्ट देती हैं—जो निरंतरता बढ़ाती हैं। (समर्थन: शारीरिक गतिविधि पर WHO के सार्वजनिक-स्वास्थ्य तर्क)

3.3 अनुशासन और समुदाय

  • नियमित जिम रुटीन “हैबिट-लूप” बनाता है; ट्रेनर-लीड सेशंस फॉर्म/टेक्नीक सिखाते हैं; टियर-2/3 में नए जिम समुदाय-आधारित मॉडल उभर रहे हैं।

4) जोखिम/हानियाँ: किन बातों से सावधान रहें

4.1 चोटें (Injuries)

  • गलत फॉर्म, बहुत तेज़ प्रोग्रेसन, या वार्म-अप/मोबिलिटी की कमी से कंधे-कमर-घुटने जैसी चोटें बढ़ती हैं—दक्षिण एशिया के वेट-ट्रेनिंग अध्ययनों में मस्कुलोस्केलेटल दर्द/इंजरी की उल्लेखनीय दरें रिपोर्ट हुई हैं, जो जिम-सेफ़्टी की अहमियत दिखाती हैं।

4.2 स्टेरॉयड/अनरजिस्टर्ड सप्लिमेंट का दुरुपयोग

  • डॉक्टरों ने हाल के कॉन्फ़्रेंस में चेताया कि कुछ युवा जिम-गोअर्स में एवस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) जैसे गंभीर हिप-कंडिशन बढ़ रहे हैं—माना जा रहा है कि अनाबोलिक स्टेरॉयड और अनियंत्रित/मिलावटी सप्लिमेंट्स इसका एक कारण हैं। महाराष्ट्र FDA द्वारा जाँच की ख़बरें भी आईं।
  • वैश्विक/क्षेत्रीय साहित्य बताता है कि रिक्रिएशनल बॉडीबिल्डिंग में AAS (anabolic-androgenic steroids) का उपयोग एक वास्तविक जोखिम है—भारत के संदर्भ में भी सोशल-मीडिया/कोचिंग इकोसिस्टम पर सवाल उठे हैं।

4.3 रेगुलेशन और लेबलिंग का पालन

  • FSSAI ने हेल्थ-सप्लिमेंट/न्यूट्रास्यूटिकल्स और “फूड फ़ॉर स्पोर्ट्सपर्संस” के लिए स्पष्ट नियम/लेबलिंग शर्तें तय की हैं; उपभोक्ताओं/जिम्स को केवल अनुपालन करने वाले उत्पाद ही इस्तेमाल/बेचने चाहिए।

5) सुरक्षित और प्रभावी जिमिंग: प्रैक्टिकल चेकलिस्ट

  1. हेल्थ-क्लियरेंस लें: कोई पुरानी बीमारी/दर्द हो तो पहले डॉक्टर/फिजियो से राय लें।
  2. क्वालिफाइड ट्रेनर चुनें: प्रमाणपत्र/अनुभव जाँचें; प्रोग्रामिंग में प्रोग्रेसिव-ओवरलोड, डीलोड और टेक्नीक को प्राथमिकता हो। (इंजरी अध्ययनों से सबक)
  3. वार्म-अप/कूल-डाउन अनिवार्य करें: मोबिलिटी, एक्टिवेशन और स्ट्रेचिंग से चोट का जोखिम घटता है।
  4. रिकवरी को जगह दें: नींद, प्रोटीन-समृद्ध संतुलित आहार, और हाइड्रेशन को रुटीन का हिस्सा बनाएँ।
  5. सप्लिमेंट समझदारी से:
  • FSSAI-कम्प्लायंट ब्रांड ही लें, लेबल/बैच-नंबर देखें; संदिग्ध “क्विक-रिज़ल्ट” वादों से बचें।
  • स्टेरॉयड से दूर रहें—AVN, हार्मोनल/हृदय जोखिम गम्भीर हैं; मेडिकल सुपरविज़न के बिना ऐसी दवाएँ क़तई न लें।

निष्कर्ष

भारत में जिम कल्चर तेज़ी से मुख्यधारा बन रहा है—ख़ासकर टियर-2/3 शहरों में। यह ट्रेंड सेहत, समुदाय और उत्पादकता के लिहाज़ से स्वागतयोग्य है, बशर्ते कि हम सेफ़्टी, वैज्ञानिक प्रोग्रामिंग और रेगुलेशन-पालन को केंद्र में रखें। सही ट्रेनिंग, जिम्मेदार सप्लिमेंट-चॉइस और डेटा-आधारित प्रोग्रेस से जिम केवल “ट्रेंड” नहीं, बल्कि लाइफ़स्टाइल-अपग्रेड बन सकता है।

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